Waterfall model in hindi

waterfall model in hindi:-

सफ्टवेयर इंजीनियरिंग के लिए waterfall model (वॉटरफॉल मॉडल) SDLC(सिस्टम डेवलपमेंट लाइफ साइकिल) का एक प्रसिद्ध और अच्छा version है। waterfall model (वॉटरफॉल मॉडल) linear तथा sequential मॉडल है इसका अर्थ यह है कि एक डेवलपमेंट phase तब तक शुरू नही हो सकता जब तक कि उसका पिछला वाला phase पूरा नही हो जाता है। हम वॉटरफॉल मॉडल में phases को overlap नही कर सकते है।

“हम वॉटरफॉल को निम्न तरीके से imagine कर सकते है:-
एक बार जब पानी चट्टान के किनारे के ऊपर से प्रवाहित होने लगता है और पहाड़ के नीचे की ओर गिरने लगता है और यह पानी ऊपर की ओर वापस नही जा सकता है।”

इसी प्रकार waterfall model भी कार्य करता है, एक बार डेवलपमेंट का एक phase पूरा हो जाता है तो हम अगले phase में चले जाते है लेकिन वापस पिछले phase में नही जा सकते है।

वॉटरफॉल मॉडल में, एक phase का आउटपुट दूसरे phase के लिए इनपुट की तरह कार्य करता है।

वटरफॉल मॉडल में निम्नलिखित 5 phases होते है  (waterfall phases in hindi):-

 

Fig:-waterfall model

1:-Requirement phase:- requirement phase वॉटरफॉल मॉडल का सबसे पहला phase है। इस फेज में सिस्टम की requirements को एकत्रित तथा documented किया जाता है। यह फेज बहुत crucial होता है क्योंकि इसी फेज पर अगले phase आधारित होते हैं।

2:-Design phase:- design phase इस तथ्य पर आधारित होता है कि सॉफ्टवेयर का निर्माण किस प्रकार होगा। डिज़ाइन फेज का मुख्य उद्देश्य सॉफ्टवेयर सिस्टम का blueprint तैयार करना है जिससे कि आने वाले phases पर किसी प्रकार की कोई दिक्कत का सामना ना करना पड़े और requirement phase में जो भी requirements है उनका solution निकाल लिया जाएँ।

3:-Implementation phase:- इस फेज में हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर तथा एप्लीकेशन प्रोग्राम्स को install किया जाता है तथा डेटाबेस डिज़ाइन को implement किया जाता है। इससे पहले की डेटाबेस डिज़ाइन को implement किया जाएं सॉफ्टवेयर को टेस्टिंग,कोडिंग, तथा debugging प्रोसेस से होकर गुजरना पड़ता है। वॉटरफॉल में यह सबसे लम्बे समय तक चलने वाला phase है।

4:-verification phase:- इस फेज में सॉफ्टवेयर को verify किया जाता है और यह evaluate किया जाता है कि हमने सही product बनाया है। इस फेज में विभिन्न प्रकार की टेस्टिंग की जाती है तथा सॉफ्टवेयर के हर area में check किया जाता है।

माना अगर हमने सॉफ्टवेयर को अच्छी तरह verify नही किया और इसमें कोई defect रह जाता है तो इसका इस्तेमाल कोई नही करेगा इसलिए verification अत्यंत महत्वपूर्ण है।

verification का एक advantage यह है कि इससे सॉफ्टवेयर के fail होने का risk कम हो जाती है।

5:-Maintenance phase:- यह वॉटरफॉल का सबसे अंतिम phase है। जब सिस्टम बनके तैयार हो जाता है तथा यूजर उसका प्रयोग करना शुरू कर देते है तब जो problems उसमें आती है उनको time-to-time हल करना पड़ता है। तैयार सॉफ्टवेयर को समय अनुसार उसका ख्याल रखना तथा उसे maintain रखना ही maintenance कहलाता है। SDLC में तीन प्रकार के maintenance होते है:-
1. corrective maintenance
2. adaptive maintenance
3. perfective maintenance.

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