decision support system (DSS) क्या है? तथा इसके विशेषताएं (characteristics) क्या है?

What is DSS in hindi (dss kya hai?):

DSS का पूरा नाम decision support system है तथा इसे decision making system भी कहते है.

“decision support system (DSS) एक इनफार्मेशन सिस्टम एप्लीकेशन है जो कि निर्णय लेने की प्रक्रिया को समर्थन (support) करता है.”
या
दुसरे शब्दों में कहें तो “DSS एक कंप्यूटर पर आधारित सॉफ्टवेर एप्लीकेशन है जो कि बिज़नस डेटा को एकत्रित करता है, उसे व्यवस्थित करता है तथा analyze (विश्लेषण) करता है तथा इस बिज़नस डेटा का प्रयोग निर्णय लेने में किया जाता है. इससे निर्णयकर्ता आसानी से निर्णय ले सकते है.”

DSS निर्णय लेने में मदद जरुर करता है परन्तु खुद अपने आप ही कभी निर्णय नहीं लेता, जबकि जो मैनेजर या निर्णयकर्ता होते है वे raw data में से तथा अलग-अलग स्रोतों से सूचना को एकत्रित करके तथा अपने ज्ञान के आधार पर समस्या को हल करते है तथा फिर निर्णय लेते है.

DSS तथा MIS के मध्य difference यह है कि MIS डेटा को प्रोसेस करके सूचना में बदलता है जबकि DSS सूचना को प्रोसेस करके निर्णय लेने में मैनेजर की सहायता करता है.

उदाहरण के लिए:- एक सैलरी इनफार्मेशन सिस्टम जो है वह प्रत्येक employee की सैलरी की जानकारी उपलब्ध कराता है. अगर employee इनकम टैक्स छूट का लाभ उठाने के लिए किसी स्कीम के तहत पैसे जमा करना चाहता है तो वह DSS का प्रयोग कर सकता है.
Decision support system यह निर्णय लेने में मदद करता है कि वह employee किस स्कीम का चयन करे तथा वह कितने पैसे जमा करे जिससे कि उसे अधिकतम फायदा मिल सके.

decision support system सूचना को चित्रों के रूप में (graphically) प्रस्तुत करता है.

1980 के दशक तक DSS का प्रयोग किया जाने लगा था.

components of Decision Support System (DSS) in hindi:-

इसके तीन components है, जो निम्नलिखित है:-

1:- DBMS
2:- MBMS
3:– यूजर इंटरफ़ेस या DGMS

1:- DBMS (डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम):- DSS के लिए डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम डेटा के एक बैंक की तरह होता है. इसमें dss के समस्या से सम्बन्धित डेटा स्टोर रहता है. यह डेटा आंतरिक तथा बाहरी स्रोतों से एकत्रित किया हुआ होता है.

2:- MBMS (मॉडल-बेस मैनेजमेंट सिस्टम):- MBMS का मुख्य उद्देश्य DBMS से प्राप्त डेटा को सूचना में बदलना है जो कि निर्णय लेने में सहायक होता है.
इसमें मॉडल्स को स्टोर तथा एक्सेस किया जाता है.

3:- यूजर इंटरफ़ेस:- यह DSS का तीसरा कॉम्पोनेन्ट है इसके द्वारा यूजर dss के साथ कम्यूनिकेट करते है.
यह यूजर के द्वारा दिए गये इनपुट को accept करता है तथा आउटपुट को स्क्रीन में दिखाता है. यह ये भी देखता है कि यूजर के द्वारा दिया गया इनपुट सही है या नहीं.
इसको कभी-कभी DGMS (डायलॉग जनरेशन मैनेजमेंट सिस्टम) भी कहते है.

Characteristics of DSS in hindi (DSS की विशेषतायें):-

DSS की विशेषताएं निम्नलिखित है:-

1:- यह निर्णय कर्ताओं को unstructured (असंचरित) तथा semi-structured (अर्ध-संचरित) समस्याओं के लिए सपोर्ट उपलब्ध करता है.

2:- यह व्यक्तिगत तथा समूह दोनों को सपोर्ट करता है.

3:- यह निर्णय लेने की बहुत सारी तकनीक तथा शैलियों को सपोर्ट करता है.

4:- यह interdependent या sequential निर्णयों को सपोर्ट करता है अर्थात् किसी निर्णय को केवल एक बार, बार-बार तथा लगातार लिया जा सकता है.

5:- यह किसी संगठन के सभी स्तरों (निम्न तथा उच्च) को सपोर्ट करता है.

6:- यह adaptive होता है अर्थात् यह किसी भी परस्थिति में ढल जाता है तथा यह flexible भी होता है अर्थात् इसमें किसी भी तत्व को add, delete, combine, change तथा rearrange कर सकते है.

7:- इसका प्रयोग हम आसानी से कर सकते है यह यूजर-फ्रेंडली होता है तथा इसमें अच्छा ग्राफिकल इंटरफ़ेस होता है.

8:- DSS में किसी भी समस्या के समाधान में निर्णय कर्ताओं का पूरा नियन्त्रण होता है.

9:- इसमें end users छोटे सिस्टमों को construct तथा modify कर सकते है.

10:- इसमें effectiveness पर ध्यान दिया जाता है efficiency पर नहीं अर्थात् इसमें समस्या के समाधान में समय जरुर लगता है लेकिन इसके निर्णय बेहतर होते है.

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